अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुकिंग और सेवाएं (Booking Services)

हम विशेष रूप से काल सर्प दोष, मंगल दोष, महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक, एवं समस्त प्रकार की कुंडली दोष, पितृ दोष और गृह प्रवेश के साथ अन्य प्रकार की सभी पूजा जैसी सभी वैदिक पूजाएं करवाते हैं।

आप वेबसाइट के द्वारा या सीधे हमें कॉल करके बुकिंग कर सकते हैं। हमें कॉल करें: +91 93291 68061

जी हाँ, अगर आप किसी कारणवश उज्जैन नहीं आ सकते, तो हम वीडियो कॉल (Video Call) के माध्यम से संकल्प लेकर आपकी पूजा संपन्न करवाते हैं और प्रसाद कूरियर से भेजते हैं।
उज्जैन यात्रा और खर्च (Travel & Cost)

पूजा का खर्च उसके प्रकार (सामूहिक या व्यक्तिगत) और सामग्री पर निर्भर करता है। सही पैकेज और दक्षिणा जानने के लिए कृपया हमें कॉल करें।

मंगल शांति के लिए मंगलवार (Tuesday) और कालसर्प के लिए सोमवार और पंचमी तिथि के अलावा पूर्णिमा, एकादशी, द्वादशी और अमावस्या का दिन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन पंडित जी आपकी कुंडली देखकर अन्य शुभ मुहूर्त भी बता सकते हैं।

सामान्य पूजा में लगभग 2 से 4 घंटे का समय लगता है। महामृत्युंजय जाप या विशेष अनुष्ठान में ज्यादा समय लग सकता है।

हम आपके बजट के अनुसार होटल, धर्मशाला या गेस्ट हाउस बुक करने में मदद कर सकते हैं। महाकाल मंदिर के पास कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं।
महत्व (Importance)

उज्जैन भगवान मंगल की जन्मभूमि है। अवंतिका खंड के अनुसार, यहाँ के मंगलनाथ और अंगारेश्वर मंदिर में किया गया अनुष्ठान सीधे ग्रहों को शांत करता है और तुरंत फलदायी होता है। मान्यता है कि सालभर में एक दिन नागपंचमी पर खुलने वाले *नागचंद्रेश्वर मंदिर* नागों के राजा का है और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की सान्निध्य में की गई कालसर्प पूजा से कालसर्प दोष शीघ्र शांत होता है।

नहीं, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। पूरी पूजा सामग्री हम उपलब्ध कराते हैं। आपको बस नए वस्त्र (कपड़े) और श्रद्धा और विश्वास के साथ आना है।

पूजा के अनिवार्य नियम

पूजन का पूरा फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य है:

  • उपवास: पूजा के पहले अन्न ग्रहण न करें। पूजन के बाद ही भोजन करें। यदि संभव हो तो उस दिन फलाहार या एक समय भोजन (एकाशना) करें।
  • भोजन नियम: अनुष्ठान वाले दिन प्याज और लहसुन खाने से बचें।
  • निषेध (45 Days): पूजा के बाद 45 दिनों तक मदिरा पान (Alcohol) और मांसाहार (Non-veg) का सेवन सख्त वर्जित है।
  • वस्त्र (रंग): पूजा में काले और नीले (Black & Blue) कपड़े पहनना वर्जित है।
  • वस्त्र त्याग: मंगल दोष पूजा के बाद स्नान करके पहने हुए कपड़े (धोती, कुर्ता, साड़ी आदि) वहीं घाट पर छोड़ने होते हैं।
  • वेशभूषा: शॉर्ट्स, जींस या टी-शर्ट न पहनें। महिलाएं सिर ढककर रखें। विवाहित स्त्रियां सुहाग की वस्तुएं धारण करें।
  • व्यवहार: अनुष्ठान में कभी भी क्रोध न करें और मन शांत रखें।
  • मोबाइल: पूजा के दौरान मोबाइल साइलेंट रखें और एकाग्रचित्त होकर बैठें।
  • संकल्प: पंडित जी जब नाम-गोत्र बोलने को कहें तो जोर से बोलें और मंत्रों का उच्चारण ध्यान से सुनें।
  • आसन त्याग: पूजा के बाद आसन के नीचे 2 बूंद जल डालकर उसे माथे से लगाएं, तभी स्थान छोड़ें (अन्यथा फल इंद्रदेव को मिलता है)।
  • क्षमा याचना: अंत में अपने आराध्य से भूल-चूक के लिए क्षमा जरूर मांगें।
गोपनीयता (Secrecy)

"गोपनीयं गोपनीयं गोपनीयं प्रयत्नतः |"

अर्थ: अपनी पूजा और साधना को सदैव गुप्त रखें। हर किसी को इसके बारे में न बताएं, अन्यथा पूजा का फल क्षीण (कम) हो सकता है।